‘महंगाई डायन खाए जात है” | युद्ध की आग में जल रही आम आदमी की रसोई | इरफान जामियावाला
मंहगाई डायन | गरीब की थाली खाली | युद्ध vs रोटी
नमस्कार, NR इंडिया न्यूज़ में आपका स्वागत है। आज की सबसे बड़ी खबर सरहद से नहीं, आपके किचन से है। क्योंकि अब “महंगाई डायन खाए जात है” सिर्फ गाना नहीं, हकीकत बन चुका है।
सब्जी मंडी, पेट्रोल पंप, परेशान मजदूर, खाली थाली
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी हिला दी है। तेल, गैस, अनाज, दवाइयां… सबके दाम आग की तरह बढ़ रहे हैं।
पिछले 100 दिन में महंगाई ने गरीब और मजदूर की कमर तोड़ दी है। दिहाड़ी मजदूर की थाली से दाल गायब है, सब्जी गायब है, कई बार तो रोटी भी गायब है।
सबसे ज्यादा मार पसमांदा मुस्लिम समाज पर पड़ी है। बुनकर, दर्जी, रिक्शा चालक, छोटे कारीगर… पहले से ही पिछड़े, अब दोहरी मार झेल रहे हैं। काम नहीं है, और जो है उससे घर का राशन पूरा नहीं पड़ता।
घर का मुखिया सुबह उठते ही सोचता है: बच्चों की फीस कैसे दूं? मां की दवा कहां से लाऊं? आज चूल्हा जलेगा भी या नहीं?
“जब महंगाई बढ़ती है तो उसका दर्द किसी एक धर्म या जाति को नहीं, पूरे समाज को झेलना पड़ता है।”
इरफान जामियावाला, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारत सेना
सवाल ये है कि क्या सरकारें युद्ध और नफरत की सियासत छोड़कर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई पर काम करेंगी? क्योंकि जंग सरहद पर होती है, लेकिन लाशें गरीब की रसोई में गिरती हैं।
आपकी इस पर क्या राय है? कमेंट में जरूर बताएं। NR इंडिया न्यूज़ को सब्सक्राइब करें।
युद्ध का असर सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, आपकी थाली पर भी पड़ रहा है। अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव से महंगाई रिकॉर्ड तोड़ रही है। गरीब, मजदूर, पसमांदा समाज की जिंदगी कैसे टूट रही है? देखिए इरफान जामियावाला की खास रिपोर्ट।
