राजनीति

बिहार समाजवादी एवं समाज सुधारक धरती सदियों से रहा – राम सुदिष्ट यादव समाजवादी

शेयर करें:

ूबिहार समाजवादी एवं समाज सुधारक धरती सदियों से रहा है लेकिन आजाद भारत के बिहार की धरती पर आज साम्प्रदायिक नफरती विचारधारा के लोग कैसे काबिज हो गए, राम सुदिष्ट यादव समाजवादी विचारक मधुबनी बिहार

मधुबनी संवाददाता मो सालिम आजाद

 

समाजवादी विचारधारा के साथियों, नई पीढी के युवा एवं बिहार के भविष्य
बिहार में जननायक कर्पूरी ठाकुर जी, भूपेन्द्र नारायण मंडल के सामाजिक न्याय एवं सैकुलर भारत निर्माण के समाजवादी रास्ते 1990 में लालू प्रसाद यादव जी जनता दल सरकार में बिहार के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने समाजवादी विचारधारा के चिंतक डॉ राममनोहर लोहिया के 1967 के नारे “संसोपा ने बांधी गांठ पिछड़े पावें सौ में साठ के अभियान को जननायक कर्पूरी जी के सामाजिक न्याय एवं सैकुलर भारत निर्माण के रास्ते पर कार्य करने लगे।
वर्ष 1990 से पूर्व सामाजिक व्यवस्था, शिक्षा, नौकरी, रोजगार, आर्थिक संसाधनों, शासन-प्रशासन आदि पर पूर्णतः उच्च वर्गीय समाज का अधिपत्य था। इस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से खेतीहर मजदूर थे, जो अपने-अपने मालिक के अधीन बंधुआ मजदूर थे। वे मालिक के अनुमति के बगैर गांव से बाहर कमाने नहीं जा सकते थे।
मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने गरीबों को पुकारा ये गाय, भैंस, बकरी, मेंबर, सुअर चलाने वालों जागो पढ़ना लिखना शिखरों… पढ़ना लिखना शिखरों । घोंघा, सितूआ चुने वालों, चूहा, मच्छली पकड़ने वालों पढ़ना-लिखना सीखों… पढ़ना-लिखना सीखों। तेल पेड़ने वालों, जलेबी बनाने वालों, खजूर से ताड़ी उतारने वालों, रस्सी बिनने वालों पढ़ना-लिखना सीखो… पढ़ना-लिखना सीखों। राज्य के ओबीसी एससी एसटी अल्पसंख्यक वर्ग को हिम्मत बढ़ी, हौसला बढ़ी, अपने गांव कस्बे से बाहर जा कर काम करने, मजदूरी करने की साहस बढ़ी। दो जो
लालू प्रसाद ने हरेक जिला के प्रखंड कृषि फार्मों में पशु चराने वाले बच्चों के लिए चरवाहा विद्यालय खोले, शिक्षकों की नियुक्ति की गई।
उस बच्चों केलिए इस स्कूल में पढ़ने, खाने, पशु चराने की सरकार द्वारा व्यवस्था की गई। शोषित पीड़ित वंचित गरीब वर्ग को मुख्यमंत्री लालू से आशा भरी एक उम्मीद बढ़ी।
पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल, जिला पदाधिकारियों को निर्देश मिला कि कोई भी आम जनता कार्यालय में पदाधिकारी से बात करने आए तो उसे कुर्सी पर बैठा कर उसकी समस्या को गंभीरता से सुने और समाधान की दिशा में कार्रवाई करें।
देखते देखते दो-तीन सालों में लालू जी 85% जनता के नज़र में मसीहा दिखाई देने लगे।
लालू प्रसाद की शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली से उत्तर-पश्चिम, पुरव भारत के कमजोर, कमेरा वर्ग, मध्यम वर्ग का आईकॉन नजर आने लगा।
लालू प्रसाद के शासन-प्रशासन की लोकप्रियता ओबीसी एससी एसटी अल्पसंख्यक वर्ग में अप्रत्याशित बढ़ते देखकर हाशिए पर चल रहे भाजपा कमंडल की राजनीति को उभारने, साम्प्रदायिक सौहार्द्र खराब कर लालू प्रसाद को चक्रव्यूह में फंसाने लगी।
वहीं जनता दल के भीतर भी समाजवादी विचारधारा के बड़े नेताओं ने लालू प्रसाद के लोकप्रियता से घबराकर लालू के शासन-प्रशासन को कमजोर करने केलिए सर्वप्रथम जनता दल में सवर्ण लॉबी ने नीतीश कुमार जी को 1994 में ही समता पार्टी बना दी।

उसके बाद लालू प्रसाद के ख़िलाफ़ पार्टी में लालू विरोधी गुट के लोग एवं भाजपा-कांग्रेस के कुछ सामंती यथास्थितिवादी विचार के लोगों से मिलकर एक चारा घोटाला का काल्पनिक आरोप लगाते हुए, लालू प्रसाद मुख्यमंत्री को पांच-छः केसों में मुदालह बना दिया।

मुख्यमंत्री के पद से लालू को हटाने में अंदर से जनता दल का यादव गुट और बाहर से नीतीश कुमार जी की समता पार्टी, भाजपा लगातार प्रयास करने लगा। जब लालू प्रसाद को समझ में आ गया कि अब जनता दल के अंदर हमारे विरोधी शरद यादव गुट , समता और भाजपा मिल कर गरीब जनता की सरकार को खत्म कर देगा, तो समाजवादी विचारधारा एवं धर्मनिरपेक्ष राजनीति में विश्वास रखने वाले साथियों के सहयोग से लालू प्रसाद यादव जी के नेतृत्व में 5 जुलाई 1997 को जनता दल का राष्ट्रीय अधिवेशन नई दिल्ली के बिहार निवास में बुलाया। और राष्ट्रीय जनता दल राजनीति पार्टी के रूप में अस्तित्व में आया एवं कुछ ही दिनों बाद राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनी जो राष्ट्रीय जनता दल की सरकार 2005 तक चली।
1998 लोकसभा चुनाव में भाजपा- समता – जनता दल के शरद यादव गुट आदि गठबंधन कर चुनाव जीत कर केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में सरकार बनी। कांग्रेस सरकार से बाहर हुई।
1999 लोकसभा चुनाव में शरद यादव का गुट जो जनता दल यूनाइटेड हों गया। भाजपा-समता-जेडीयू एक गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा और जीता। फिर वाजपेई जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी।
कांग्रेस-राजद-कम्युनिस्ट एलाइंस यूपीए की सरकार हरी।

फिर 2000 ईवीं में जदयू से राम विलास पासवान जी अलग हो गए और लोक जनशक्ति पार्टी बना लिए। लेकिन भाजपा गठबंधन का हिस्सा बने रहे।
फिर 2003 में नीतीश कुमार जी की समता पार्टी और कर्नाटक के रामकृष्ण हेगड़े की पार्टी का जनता दल यूनाइटेड में विलय हो गया। जिसका राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव हुए, पार्टी के संरक्षक जॉर्ज फर्नांडिस हुए और पार्टी के नेता नीतीश कुमार जी हुए।
वहीं नवम्बर 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा, लोजपा और घोर साम्प्रदायिक पार्टी भाजपा गठबंधन की संयुक्त सरकार नीतीश जी के नेतृत्व में बनी। लगभग 17-18 सालों से बिहार में भाजपा पिछड़ों के पिछलग्गू बन के सत्ता में रहते रहते आज जनता दल यूनाइटेड के नेतृत्व को निगल गया। भाजपा के नेतृत्व में बिहार में सरकार चल रही है।
जमीनी सच्चाई है कि पिछड़े दलित आदिवासी अल्पसंख्यक दिन-प्रतिदिन हाशिए पर चलती जा रही है। मौलिक अधिकारें छिनी जा रही है। भाजपा सरकार लगातार समात, स्वतंत्रता, समानता, बंधुता की संवैधानिक ढ़ांचे को कमजोर कर रही है। तानाशाही वाली व्यवस्था निर्माण कर रही है।
भाजपा सरकार के संविधान विरोधी कार्यों में, तानाशाही वाली कानून बनाने में, सरकारी शिक्षा नौकरी रोजगार को समाप्त करने एवं निजी पूंजीपतियों को देने में बिहार के नीतीश कुमार जी के सांसद, चिराग पासवान जी के सांसद, जीतनराम मांझी साहब, उपेन्द्र कुशवाहा जी। यूपी के ओम प्रकाश राजभर जी, अनुप्रिया पटेल जी, संजय निषाद जी, महाराष्ट्र के रामदास आठवले जी सभी के सांसद भाजपा सरकार को तानाशाही शासन चलाने में मददगार है। भाजपा द्वारा राजतांत्रिक कानून बनाने में, वोट चोरी डकैती करने की योजना में मजबूती के साथ दे रहे हैं। और अपने आपको बहुजन का नेता भी कहते हैं।
ऐसी स्थिति में आज लगभग 20 सालों से राष्ट्रीय जनता दल सत्ता बाहर रहने के बाद भी राज्य और देश में साम्प्रदायिक विचारधारा व भाजपा के तानाशाही, संविधान विरोधी, पारदर्शी लोकतंत्र विरोधी पार्टी के खिलाफ सामाजिक न्याय एवं धर्मनिरपेक्ष विचारधारा की पार्टी राजद की प्रसांगिकता मौजूद हैं और आगे भी बनी रहेगी। इसलिए राष्ट्रीय जनता दल को मुद्दे आधारित राजनीति पर केन्द्रित करें। मुद्दे आधारित राजनीति में अधिक शक्तिशाली और लम्बी दूरी तय करने वाली होती है।
वहीं धर्म और जाति पर आधारित राजनीति एक खास दौर तक सीमित रहती है। समाजवादी विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टी पहला उद्देश्य होना चाहिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती की दिशा में काम करते रहना। संविधान में मौजूद जनता की अधिकारों की 100% हिफाजत करना। संवैधानिक कानून का लाभ निचले स्तर तक पहूंचाने पर केन्द्रित होना।
आमतौर पर देखा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की मंडल कमीशन से पिछड़ों में प्रतिक्रांतिकारी, पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की आर्थिक क्रांति, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह की पिछड़े दलित में शिक्षा क्रांति के बाद राजनीतिक जनप्रतिनिधि लोग व्यक्तिगत सुख-सुविधाएं पर जोर देने से कार्यकर्ताओं में सुख-सुविधाएं की ललक जागृत हुई है। जिसके कारण जनता के ज्वलंत मुद्दों पर संघर्ष करने की क्षमता घटती जा रही है। इसलिए इससे सचेत होने की आवश्यकता है।
आप 5 जुलाई राष्ट्रीय जनता दल का 30वां स्थापना दिवस है। यह दिन समाजवादी विचारधारा की राजनीति करने वालों केलिए, सामाजिक न्याय की विचारधारा को समाज में स्थापित करने वालों केलिए, धर्मनिरपेक्ष भारत की निर्माण करने वालों के लिए और भारत में लोकतंत्र एवं संविधान की हिफाजत करने की जजवा वालों केलिए ऐतिहासिक दिन है। देश भर के समाजवादियों को सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता केलिए मजबूत पार्टी राष्ट्रीय जनता दल पर गर्व है।
सामाजिक न्याय के वैचारिक अपराजित योद्धा और साम्प्रदायिक राजनीति के सबसे बड़े दुश्मन राष्ट्रीय नेता माननीय लालू प्रसाद यादव जी को समाजवादी विचारक राम सुदिष्ट यादव मधुबनी बिहार की ओर से कोटि-कोटि प्रणाम

आगे क्या पढ़ें AI

अपनी राय रखें