राजनीति

इस बार एम एल सी चुनाव में भी नेतालोग “वंश परंपरा” को बनाए रखेंगे , कार्यकर्ता सिर्फ झंडा ढोएंगे ।

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इस बार एम एल सी चुनाव में भी नेतालोग “वंश परंपरा” को बनाए रखेंगे , कार्यकर्ता सिर्फ झंडा ढोएंगे ।

*तस्वीर अभी ऐसी बन रही है:*

रिपोर्ट सुधीर मालाकार। हाजीपुर (वैशाली)

*लोजपा*: संभावित उम्मीदवार सीमांत मृणाल – चिराग पासवान के भांजे और पूर्व सांसद मृणाल पासवान के बेटे। दरभंगा विधानसभा में किस्मत नहीं चली, अब SC आयोग के अध्यक्ष हैं।
– *रालोमो/उपेंद्र कुशवाहा गुट*: बेटे दीपक प्रकाश की उम्मीदवारी लगभग तय।
– *जदयू*: चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत के लिए एक सीट पक्की।
– *हम*: जीतन राम मांझी भी एक सीट मांग रहे हैं। उम्मीदवार कौन होगा ये अभी पत्ते नहीं खुले। परिवार में विकल्प पहले से “सेट” बताए जा रहे हैं।
– *राजद*: तेजप्रताप vs राजद वाली खींचतान मीडिया में खूब चल रही। तेजप्रताप अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल से लड़ना चाहते हैं, राजद चाहती है कि राजद के सिंबल पर लड़ें। बात नहीं बनी तो रोहिणी आचार्य का नाम भी हवा में है।

और अंत वाली लाइन तो कड़वी सच्चाई है – सेटिंग के बाद अगर कोई सीट बची तो “पार्टी वर्कर्स” का नंबर आएगा। वो भी वही जिनके पास पार्टी को “घीया-तोरई” के साथ-साथ देने को कुछ और भी हो। बाकी कार्यकर्ता फोटो में पीछे खड़े होकर फ्रेम भर देंगे, वो मुफ्त में।
बिहार की राजनीति में ये नई बात नहीं है, पर हर चुनाव में ये डिस्कशन फिर से गरम हो जाता है – अनुभव vs वंश, संगठन vs परिवार।

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