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मुस्लिम वोट लेने वाले दल अब प्रतिनिधित्व से बना रहे दूरी: मशकूर अहमद

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मुस्लिम वोट लेने वाले दल अब प्रतिनिधित्व से बना रहे दूरी: मशकूर अहमद

मधुबनी संवाददाता मो सालिम आजाद

पटना। बिहार शरीफ के मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता मशकूर अहमद ने बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के परिणामों और उम्मीदवारों के चयन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मुद्दा लगातार कमजोर होता दिखाई दे रहा है।
मशकूर अहमद ने आरोप लगाया कि जिन राजनीतिक दलों को लंबे समय तक मुस्लिम समाज का समर्थन मिलता रहा, वे अब मुस्लिम नेतृत्व और भागीदारी को पहले जैसी प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू प्रसाद यादव के परिवार का उल्लेख करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज के बीच इस विषय पर गंभीर चर्चा और आत्ममंथन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हालिया MLC चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के हिस्से में आई एकमात्र सीट पर अशरफ अंसारी को MLC बनाकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिया है। उनके अनुसार यह फैसला उन दलों के लिए भी संदेश है जो स्वयं को धर्मनिरपेक्ष राजनीति का प्रतिनिधि बताते हैं।
मशकूर अहमद ने कहा कि मुस्लिम समाज को केवल पारंपरिक राजनीतिक निष्ठा तक सीमित रहने के बजाय अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व, भागीदारी और अधिकारों के सवाल पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि समुदाय इस दिशा में सक्रिय नहीं हुआ तो भविष्य में उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी और कमजोर हो सकती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव के परिवार और RJD के भीतर मुस्लिम नेतृत्व को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सामने आए कुछ विवादों ने मुस्लिम समाज के एक वर्ग के बीच असंतोष को बढ़ाया है। उन्होंने मांग की कि सभी राजनीतिक दल मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखें।
मशकूर अहमद ने कहा कि बिहार की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मुद्दा आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है और समाज को अपने हितों तथा भविष्य की राजनीतिक दिशा पर गंभीरता से विचार करना होगा।

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