महुआ में 5 हजार से 60 हजार तक में बिके ताजिया, मोहर्रम पर कौमी एकता की मिसाल
ईद के बाद शुरू होता है ताजिया निर्माण, शाही मस्जिद परिसर में लगे दो दर्जन कारीगर, डीजे पर प्रतिबंध

महुआ। शुक्रवार को मोहर्रम है। इसे लेकर मुस्लिम समुदाय के लोग ताजिया की खरीदारी में जुटे हैं। महुआ में बुधवार को 5 हजार से लेकर 60 हजार रुपए तक में ताजिया की बिक्री हुई। कर्बला में पहलाम के लिए मुस्लिम परिवार के लोग अपने कद के अनुसार ताजिया खरीद रहे हैं।
जवाहर चौक स्थित शाही मस्जिद परिसर में ग्रामीण कारीगरों द्वारा एक से बढ़कर एक आकर्षक ताजिया बनाया गया है। ताजिया का कारोबार कर रहे सज्जाद ने बताया कि ईद के बाद ही ताजिया का निर्माण शुरू हो जाता है। बांस की कमाचियों को सजाकर कारीगरों द्वारा बेहतरीन ताजिया तैयार किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि यहां 5 हजार से 60 हजार और उससे भी अधिक कीमत के ताजिया बनाए गए हैं। लोग पहलाम के लिए अपने कद के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। ताजिया निर्माण में दो दर्जन से ज्यादा कारीगरों को रोजगार मिला है। मोहर्रम पर ताजिया का परिनाम कर्बला में किया जाता है।
कौमी एकता का प्रतीक है ताजिया:
ताजिया हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच कौमी एकता का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व पर मुस्लिम समुदाय के साथ हिंदू समाज के लोग भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। जब ताजिया जुलूस क्षेत्र भ्रमण पर निकलता है तो रास्ते में जगह-जगह हिंदू समाज की महिलाएं अगरबत्ती दिखाकर पैसे चढ़ाती हैं। जुलूस में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के युवा करतब दिखाकर लोगों को आकर्षित करते हैं।
झरनी गीत से कौमी एकता का संदेश:
मोहर्रम पर ताजिया निकालकर मुस्लिम समुदाय के लोग झरनी गीत गाते हैं—
_“दाहा देखे गेलिअई मकईया तोरी लेलिअई, धरी लेलथिन राजा जी के बेटबे आय हाय… छोरी दहू येहो राजाजी हमरो अचरवा, रोवत होयतै घर में गोदी के बलकबा आय हाय…”_
इधर महुआ से लेकर शेरपुर, छतवारा, चकमजाहिद, लक्ष्मीपुर, डोगरा, कन्हौली, चकनसीर, अबाबकरपुर, फुलाथ, मधौल, चांदसराय, सेहान, पातेपुर, खाजेचांद, गंगटी सहित विभिन्न जगहों पर ताजिया जुलूस निकालने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
प्रशासन ने ताजिया जुलूस में डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया है और पर्व को सादगी के साथ मनाने की अपील की है।
