‘हर घर शुद्ध जल’ डॉक्यूमेंट्री ने झकझोरा समाज का अंतर्मन
रेड बल्ब स्टूडियो में जल संकट और मानवता पर बनी डॉक्यूमेंट्री ने दर्शकों को किया भावुक

मुंबई। कल शाम रेड बल्ब स्टूडियो में प्रदर्शित 30 मिनट की सामाजिक डॉक्यूमेंट्री “हर घर शुद्ध जल” ने उपस्थित दर्शकों के मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी। यह केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारत के गांव-गांव में व्याप्त जल संकट, प्रदूषित पेयजल और उससे जुड़ी मानवीय त्रासदी का सजीव दस्तावेज़ थी।
इस प्रेरणादायक डॉक्यूमेंट्री के पीछे सुरेंद्र शर्मा और बंटी श्रीवास्तव की वर्षों की मेहनत और सामाजिक समर्पण दिखाई दिया। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज के प्रति संवेदनशीलता हो, तो बदलाव संभव है। फिल्म में दिखाया गया कि आज भी देश के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे गंभीर बीमारियाँ, विकलांगता और असमय मृत्यु जैसी दुखद परिस्थितियाँ पैदा हो रही हैं।
डॉक्यूमेंट्री का सबसे प्रेरणादायक पक्ष यह रहा कि लगातार प्रयासों से सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित हुआ और कई क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। इस प्रयास से हजारों लोगों का जीवन सुरक्षित हुआ। यह उपलब्धि बंटी श्रीवास्तव और उनकी पूरी टीम के साथ-साथ उन सभी लोगों की है जिन्होंने इस जनहित अभियान में सहयोग दिया।
डॉक्यूमेंट्री के दोनों शो हाउसफुल रहे, जो इस विषय के प्रति समाज की बढ़ती संवेदनशीलता का प्रमाण है। कार्यक्रम में भारतीय फिल्म जगत, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें गजेंद्र चौहान, अतुल श्रीवास्तव, अली खान, हर्ष भटनागर, राजीव निगम, योगेश भारद्वाज, शैलेंद्र गौड़, इरफान जामियावाला, अशफाक कोप्पिकर, सचिन्द्र शर्मा, रमेश गोयल, बलवीर चंद (सचिन), अमित घनश्याम, संजीव पांडे, कृष्ण शर्मा तथा संगीतकार विष्णु नारायण सहित अनेक कलाकार, तकनीशियन और मीडिया जगत के लोग उपस्थित रहे।
विशेष रूप से अभिनेता एवं समाजसेवी अमित घनश्याम का योगदान उल्लेखनीय रहा, जिनके प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ इस आयोजन से जुड़ीं। कार्यक्रम के समापन पर बच्चियों द्वारा प्रस्तुत फिल्मी गीतों पर आधारित सांस्कृतिक नृत्य ने वातावरण को और भी भावनात्मक एवं प्रेरणादायक बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रस्तुत जल संरक्षण पर आधारित यह मार्मिक कविता सभी के हृदय को छू गई—
“अपने-अपने आँसुओं से सींच लो अपनी खेती,
महँगा मौसम, महँगी फसलें, आँख दिखाए खेती।”
यह पंक्तियाँ केवल कविता नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाले भविष्य की एक गंभीर चेतावनी हैं। यदि आज भी जल संरक्षण को लेकर समाज और सरकार ने मिलकर व्यापक प्रयास नहीं किए, तो आने वाली पीढ़ियाँ पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करती नज़र आएँगी।
“हर घर शुद्ध जल” केवल एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि समाज के लिए एक जागरण अभियान है, जो हमें यह संदेश देती है कि जल ही जीवन है और इसका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
