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इबोला जैसी आपदा से निपटने को तैयार एम्स पटना, रविवार को हुआ व्यापक मॉक ड्रिल

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इबोला जैसी आपदा से निपटने को तैयार एम्स पटना, रविवार को हुआ व्यापक मॉक ड्रिल

फुलवारी शरीफ फातमा जहां।

 

संभावित संक्रामक रोगों से निपटने की अपनी तैयारियों को और मजबूत बनाने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना ने रविवार को इबोला वायरस रोग मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया। इस अभ्यास के माध्यम से अस्पताल में किसी संदिग्ध इबोला मरीज के प्रवेश से लेकर उसके नमूने को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे भेजे जाने तक की पूरी प्रक्रिया का वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रदर्शन किया गया।

यह मॉक ड्रिल कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह की उपस्थिति में आयोजित की गई। इस दौरान विभिन्न विभागों के चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञ, सुरक्षा कर्मी एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
अभ्यास की शुरुआत एक काल्पनिक संदिग्ध इबोला मरीज के अस्पताल पहुंचने से हुई। स्क्रीनिंग के दौरान मरीज की पहचान होते ही उसे निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षित मार्ग से आइसोलेशन क्षेत्र में पहुंचाया गया। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) पहनने, संक्रमण नियंत्रण उपायों का पालन करने तथा जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्य करने का प्रदर्शन किया।

मॉक ड्रिल में आपातकालीन चिकित्सा विभाग, सामान्य चिकित्सा विभाग, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग, क्रिटिकल केयर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग सेवाएं, संक्रमण नियंत्रण इकाई, सुरक्षा विभाग, स्वच्छता सेवाएं एवं एम्बुलेंस सेवाओं ने समन्वित रूप से भाग लिया। पूरे अभ्यास में विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला।

ड्रिल का सबसे महत्वपूर्ण चरण संदिग्ध मरीज के नमूनों का सुरक्षित संग्रहण, ट्रिपल-लेयर पैकेजिंग तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्हें एनआईवी, पुणे भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास था। इसके साथ ही आवश्यक दस्तावेजीकरण और सूचना संप्रेषण व्यवस्था का भी परीक्षण किया गया।

इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उभरती संक्रामक बीमारियों के मद्देनजर स्वास्थ्य संस्थानों की सतत तैयारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास न केवल संभावित चुनौतियों की पहचान करते हैं बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में भी मदद करते हैं।

प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल स्वास्थ्यकर्मियों को किसी भी आपदा या संक्रामक रोग के प्रबंधन के लिए सदैव तैयार रखते हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे अभ्यास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस सफल मॉक ड्रिल ने एक बार फिर यह साबित किया कि एम्स पटना किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क, सक्षम और प्रतिबद्ध है।

 

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