श्रीअन्न पर चार पुस्तकों के प्रकाशन करने वाले देश के पहले किसान की राज्य सरकार से मांग
कृषि व संबंधित विभागों में वितरित हों पुस्तकें, सरकारी स्तर पर मिले प्रमोशन

बदलते मौसम, जल संकट और कुपोषण के इस दौर में ‘श्रीअन्न’ (मोटे अनाज) को जन-आंदोलन बनाने के लिए अब सरकारी तंत्र को आगे आना होगा। श्रीअन्न के वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व पर चार प्रामाणिक पुस्तकों का प्रकाशन कर चुके वरिष्ठ विशेषज्ञ और लेखक, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित जितेंद्र सिंह ने राज्य सरकार और कृषि विभाग से इन पुस्तकों को सरकारी स्तर पर प्रमोट करने की पुरजोर मांग की है।
लेखक का स्पष्ट कहना है कि नीतियां सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर तब उतरेंगी जब खेतों में काम करने वाले कृषि अधिकारियों और प्रसार कर्मियों के पास सही और सटीक ज्ञान होगा। इसलिए, सरकार को इन चारों पुस्तकों को कृषि विभाग और उससे जुड़े अन्य संबंधित विभागों में अनिवार्य रूप से वितरित करना चाहिए।
राज्य के सभी जिला कृषि कार्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को यह पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे किसानों का सही मार्गदर्शन कर सकें। प्रकाशित पुस्तक “मोटा अनाज- सेहत का खजाना” पोषण और ऊर्जा का स्रोत- मोटा अनाज” “श्रीअन्न- प्रकृति का अनमोल उपहार” एवं “श्रीअन्न- स्वाद और सेहत का संतुलन” (मिट्टी से महाशक्ति तक श्रीअन्न की वापसी)

इन पुस्तकों को केवल कृषि तक सीमित न रखकर शिक्षा विभाग (मिड-डे मील हेतु) तथा महिला एवं बाल विकास विभाग (आंगनबाड़ी व जीविका समूहों हेतु) में भी वितरित किया जाए, जिससे कुपोषण के खिलाफ जंग जीती जा सके। राज्य सरकार द्वारा आयोजित होने वाले कृषि मेलों और मिलेट महोत्सवों में इन पुस्तकों के प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार के लिए विशेष व्यवस्था की जाए।
कम खर्च में महा-क्रांति का माध्यम है। श्रीअन्न, की खेती में धान- गेहूं के मुकाबले मात्र एक-चौथाई पानी लगता है और इसमें रासायनिक खादों और कीटनाशी दवाओं की जरूरत नहीं होती। यह मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ-साथ,पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।
जितेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि एक शोधकर्ता के रूप में मैंने अपना कर्तव्य पूरा करते हुए समाज को चार पुस्तकें सौंपी हैं। अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस ज्ञान को प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनाए, ताकि कम लागत में हमारे किसान खुशहाल और आत्मनिर्भर बन सकें।
