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ड्रेस कोड लागू हुआ तो शिक्षकों को वर्दी भत्ता भी मिले ,मशकूर आलम

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ड्रेस कोड लागू हुआ तो शिक्षकों को वर्दी भत्ता भी मिले ,मशकूर आलम

बिहार प्रदेश प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता मशकूर आलम ने शिक्षकों पर ड्रेस कोड लागू किए जाने की चर्चा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य करने का निर्णय ले लिया है, तो इसके साथ शिक्षकों के अधिकारों और सुविधाओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। शिक्षक सदैव अनुशासन, मर्यादा और गरिमापूर्ण आचरण के पक्षधर रहे हैं। यदि सरकार विद्यालयों में एकरूपता और अनुशासन के उद्देश्य से ड्रेस कोड लागू करना चाहती है, तो उसके लिए आवश्यक आर्थिक व्यवस्था करना भी सरकार की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है। केवल नियम लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन नियमों के पालन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
मशकूर आलम ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख माँगें रखीं—

1. प्रत्येक शिक्षक को प्रतिवर्ष सम्मानजनक वर्दी भत्ता प्रदान किया जाए।
2. प्रत्येक वर्ष कम-से-कम दो जोड़ी वर्दी अथवा उसके समतुल्य राशि शिक्षकों को उपलब्ध कराई जाए।
3. गर्मी एवं सर्दी के मौसम के अनुरूप अलग-अलग वर्दी अथवा उसके लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाए।
4. ड्रेस कोड लागू करने से पूर्व सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों एवं शिक्षक प्रतिनिधियों से विस्तृत विचार-विमर्श किया जाए।
5. सरकार सबसे पहले शिक्षकों की वर्षों से लंबित समस्याओं—समयबद्ध पदोन्नति, सेवा सुरक्षा, स्थानांतरण नीति, वेतन विसंगतियाँ, पुरानी सेवा संबंधी समस्याएँ तथा अन्य लंबित मांगों—का समाधान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, उसके संस्कार, उसके चरित्र और राष्ट्र निर्माण के प्रति उसके समर्पण से होता है। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले शिक्षकों के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि ड्रेस कोड लागू किया गया है, तो उसके साथ वर्दी भत्ता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी स्पष्ट घोषणा की जाए। साथ ही शिक्षकों की लंबित समस्याओं का समाधान कर सरकार यह संदेश दे कि वह केवल दायित्व बढ़ाने में नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और हितों की रक्षा के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध है।
अंत में उन्होंने कहा—
“यदि ड्रेस कोड लागू हो गया है, तो वर्दी भत्ता भी मिलेगा।
यदि नियम लागू होंगे, तो शिक्षकों के अधिकार भी सुरक्षित होंगे।
शिक्षक का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है।

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