महुआ-कढ़निया रोड पर कचरे का अंबार, बदबू से बेहाल ग्रामीण – छठ घाट बना कचरा डंप
रिपोर्ट सुधीर मालाकार
महुआ, वैशाली |
पर्यावरण दिवस पर जहां पूरे देश में स्वच्छता और वनस्पति संरक्षण का संकल्प लिया जा रहा है, वहीं महुआ प्रखंड का कढ़निया गांव बदबू और प्रदूषण की मार झेल रहा है। महुआ मंगरू चौक से ईमादपुर जाने वाले मुख्य सड़क मार्ग पर कढ़निया गांव के किनारे महुआ नगर निगम द्वारा रोजाना कचरा गिराया जा रहा है।
*नरक बना रास्ता:*
सड़क किनारे सिर्फ घरेलू कचरा ही नहीं, लावारिश मृत जानवरों को भी फेंक दिया जाता है। कचरे से उठने वाली बदबू के कारण राहगीरों और ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “सड़क से गुजरना नरक से कम नहीं लगता।”
*प्रदूषण और खतरा दोनों:*
1. *वायु प्रदूषण*: कचरे को जलाने से जहरीला धुआं निकलता है, जिससे सांस की बीमारी का खतरा बढ़ गया है। राहगीर आग की लपटों को देखकर डर जाते हैं कि कहीं कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए, क्योंकि आए दिन आग की घटनाएं हो रही हैं।
2. *जल प्रदूषण*: नदी के किनारे कचरा गिरने से वाया नदी गंदगी से पट गई है। नदी नाली जैसी दिखने लगी है। सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर छठ पूजा और प्रकृति आनंद के लिए घाट बनवाया था, लेकिन नगर निगम के कचरे ने पूरी प्रकृति को दूषित कर दिया है।
*बीमारी का खतरा:*
गांव में अज्ञात बीमारी फैलने का डर मंडराने लगा है। बदबू, धुआं और गंदे पानी के कारण ग्रामीणों का स्वास्थ्य खतरे में है।
*शिकायत के बाद भी अनसुनी:*
ग्रामीणों ने इस समस्या से पूर्व में *महुआ अनुमंडल पदाधिकारी, पूर्व विधायक और महुआ नगर परिषद* को लिखित आवेदन देकर अवगत कराया था। बावजूद इसके किसी ने संज्ञान नहीं लिया। नतीजा – कचरा गिरना आज भी बदस्तूर जारी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण दिवस के अवसर पर कम से कम इस मामले को गंभीरता से लेकर कचरा डंपिंग पर रोक लगाई जाए और वैकल्पिक जगह चिन्हित की जाए।
