सड़क हादसे में घायल शिक्षक जुनैद खान का इंतकाल, गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक

मधुबनी संवाददाता मो सालिम आजाद
लहवार निवासी एवं शफी मुस्लिम हाई स्कूल के शिक्षक जनाब जुनैद खान साहब का पटना के पारस अस्पताल में इलाज के दौरान इंतकाल हो गया। 10 अगस्त को दुमदुमा यतीमखाना के पास हुए सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद उनका पटना में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
इंतकाल की खबर मिलते ही लहवार समेत आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। एक हंसमुख, खुशमिजाज और मिलनसार शिक्षक के साथ-साथ गांव-समाज के जिम्मेदार व्यक्ति के इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से लोग बेहद गमगीन हैं। उनके चाहने वालों और परिचितों ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
जुनैद खान साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-असर उनके पैतृक गांव लहवार में अदा की गई, जिसके बाद गमगीन माहौल में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा खानकाह समरकंदिया दरभंगा के बाबू हुज़ूर ने पढ़ाई। जनाज़े में हजारों की संख्या में लोगों ने शामिल होकर मरहूम को अंतिम विदाई दी। जनाज़े में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और रिश्तेदारों ने शामिल होकर मरहूम को अंतिम विदाई दी।
जुनैद खान के इंतकाल पर गहरे रंज-ओ-गम का इजहार करते हुए JDU नेता एवं ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने कहा कि जुनैद खान साहब के इंतकाल की भरपाई मुश्किल है। उन्होंने कहा कि वे हंसमुख और खुशमिजाज शिक्षक होने के साथ-साथ गांव और समाज के लिए एक जिम्मेदार शख्स थे। उनका अचानक चले जाना बेहद दुखद है।
नजरे आलम ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां परिवार मरहूम के अहले-खाना के गम में बराबर का शरीक है।
