Uncategorized

शंभूपुर कोआरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत सफल प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित

शेयर करें:

बाल विवाह के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित चित्रकला, स्लोगन एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया

 

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत भगवानपुर प्रखंड स्थित शंभूपुर कोआरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बाल विवाह के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित चित्रकला, स्लोगन एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा उन्हें शिक्षा, समान अवसर और बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना था।

यह कार्यक्रम स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार ने की, जबकि संचालन अधिकार मित्र संतोष कुमार ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंचायत की मुखिया श्रीमती अंजुला कुमारी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के निदेशक डॉ. सुधीर कुमार शुक्ला ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा, “बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के संवैधानिक एवं मानवीय अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। जब तक प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त नहीं होगा, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।”

उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक देश को बाल विवाह मुक्त बनाने का राष्ट्रीय संकल्प लिया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब समाज, विद्यालय, अभिभावक, प्रशासन और युवा मिलकर जन-जागरूकता की सशक्त श्रृंखला तैयार करें। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने के साथ-साथ अपने परिवार, पड़ोस और समाज में भी बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता का संदेश फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बच्चों की सक्रिय भागीदारी और समाज के सामूहिक प्रयासों से “2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत” का संकल्प अवश्य साकार होगा।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे अधिकार मित्र संतोष कुमार ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक विकास और भविष्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है तथा बाल विवाह की किसी भी घटना की सूचना संबंधित प्रशासन एवं चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तक पहुँचाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने तथा समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि मुखिया श्रीमती अंजुला कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार है तथा समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाए।

चित्रकला प्रतियोगिता में वंदना ने प्रथम, माही कुमारी ने द्वितीय तथा जानवी कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्लोगन प्रतियोगिता में सौम्या कुमारी प्रथम, संध्या कुमारी द्वितीय तथा नंदनी कुमारी तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं निबंध लेखन प्रतियोगिता में सृष्टि कुमारी ने प्रथम, एरम अमीमा ने द्वितीय तथा प्रिया कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का समापन “वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने” के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अतिथियों ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के उन्मूलन तथा प्रत्येक बच्चे के सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक भविष्य के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

आगे क्या पढ़ें AI

अपनी राय रखें